उत्तराखंड में बीजेपी के स्मृति चिह्न पर छपा कुछ ऐसा कि देखते ही मंच गया हंगामा, हो सकती है जेल

उत्तराखंड में बीजेपी के स्मृति चिह्न पर छपा कुछ ऐसा कि देखते ही मंच गया हंगामा, हो सकती है जेल

प्रदेश की सत्ता धारी सरकार यानि भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्मृति चिह्न पर जाने अनजाने कुछ ऐसा कारनामा कर दिखया जिससे एक बड़ा हंगामा मच गया। बीजेपी ने अपने स्मृति चिन्ह को इस तरह डिज़ाइन कराया है जिससे केंद्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है। जिसके लिए उसे सज़ा भी मिल सकती है।

दरअसल,गुरुवार को प्रदेश के उधमसिंघनगर जिले के काशीपुर में प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमे बैठक में आए अतिथियों को आयोजकों की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किए गए, स्मृतिचिह्न डिज़ाइन करवाने वाले ने उसमे राष्ट्रीय चिह्न अशोक की लॉट का भी इस्तेमाल किया है। जिससे एक बड़ा हंगामा मच गया। बता दे की अशोक की लाट का इस तरह से उपयोग करना भारत के राज्य प्रतीक चिन्ह (अनुचित उपयोग का निषेध) अधिनियम-2005 के तहत कानूनन अपराध है । इसके दुरुपयोग पर कानून में सजा का भी प्रावधान है। बीजेपी के स्मिर्ति चिन्ह में एक और बीजेपी का चुनाव चिह्न कमल का फूल बना है और दूसरी ओर अशोक की लाट का उपयोग किया गया है। साथ ही इसमें प्रदेश कार्यसमिति 12 जुलाई काशीपुर लिखा गया है। गौरतलब है की इस कार्यसमिति में प्रदेश के अलावा भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के पदाधिकारियों ने भी शिरकत की। यह स्मृति चिन्ह भाजपा के सह महामंत्री (संगठन) शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू और मु्ख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत अन्य अतिथियों को भेंट किए गए।


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भारत का राजचिन्ह और इसके उपयोग के प्रावधान
बता दे की भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में वाराणसी सरनाथ संग्रहालय में संरक्षित अशोक लाट को 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया, जिस दिन भारत एक गणतंत्र देश बन। यह प्रतीक भारत सरकार के आधिकारिक लेटरहेड का एक हिस्सा है और सभी भारतीय मुद्रा पर भी प्रकट होता है। यह कई स्थानों पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में भी कार्य करता है और भारतीय पासपोर्ट पर प्रमुख रूप से प्रकट होता है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज के केन्द्र में अशोक चक्र (पहिया) अपने आधार पर स्थित हैं। प्रतीक का प्रयोग भारत के राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 के अंतर्गत विनियमित और प्रतिबंधित है। आधिकारिक पत्राचार के लिए किसी व्यक्ति या निजी संगठन को प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। यदि कोई प्रतीक चिह्न का दुरूपयोग करता है तो इसी अधिनियम की धारा-सात में दो साल तक की सजा और पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित करने का प्रावधान है।

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