‘पैड मैन’ ने तोड़ी शर्म की बंदिश , बेबाक होकर किया सबने बड़ी कुरीति का विरोध

Pade Man' broke the shame of shame;

‘पैड मैन’ ने समाज में महिलाओ फैली एक ऐसी कुरीति को सबके समक्ष रखा है। जिससे महिलाओ को दोचार होना पड़ता है। यह हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्यां है की इसे कहने से लोग घबराते है। दुर्व्यवहार करते है। पीरियड्स यानी कि माहवारी स्त्रियों के मातृत्व से संबन्धित प्रक्रिया है और चूंकि मातृत्व दुनिया का सबसे खूबसूरत और प्यारा एहसास (लाक्षणिक तौर पर) होता है इसलिए स्त्रियों से संबन्धित अन्य प्रक्रियाओं को भी तो स्वच्छ और सुखद होना चाहिए| पर सेक्स-एजुकेशन के अभाव और ढकोसलों से भरे भारतीय समाज में माहवारी को एक घिनौना, अस्वच्छ और डरावना अनुभव बना दिया जाता है। स्त्रियों को देवी मानने वाले इस समाज में पीरियड्स आने पर औरतों के साथ अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है।

माहवारी यानी पीरियड्स एक शारीरिक नहीं बल्कि समस्या है क्योंकि माहवारी अगर शारीरिक समस्या होती तो मेडिकल साइंस ने इसका कोई-न-कोई हल जरूर निकला होता| वास्तव में माहवारी एक सामान्य ‘जैविक प्रक्रिया’ है जिसे सेक्स एजुकेशन के अभाव में लड़कों के लिए घृणा, जुगुप्सा और लड़कियों में डर का रूप दे दिया जाता है।

भारतीय समाज ही नहीं बल्कि समूचे दक्षिण एशियाई समाज में मासिकधर्म के दौर से गुजरने वाली लड़कियों कि क्या दशा होती है इसे नेपाल के सुदूर पश्चिमी इलाकों में होने वाली ‘छाऊपड़ी’ नाम की परंपरा से समझा जा सकता है। हिन्दू बहुल नेपाल में सदियों से जारी एक अमानवीय प्रथा है, जिसमें पीरियड्स आने पर महिलाओं के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जाता है। महिलाओ के साथ होते इस अमानवीय व्यवहार को दर्शाते हुए लंबे इंतजार के बाद अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ बॉक्सऑफिस पर आज रिलीज हो गई। ‘पैड मैन’ को सिंगल रिलीज का जबरदस्त फायदा मिलने वाला है। सुबह वाले शो से ही इसे देखने के लिए भीड़ नजर आई। सबसे अच्छी बात यह है कि परिवार इसे देखने आ रहे हैं। महिलाएं अगर किसी फिल्म को देखने सुबह निकलती हैं तो उसे तो कोई नुकसान होने से रहा।फिल्म मूल रूप से तमिलनाडु निवासी पद्मश्री अरुणाचलम मुरुगनाथन के जीवन से प्रेरित है मगर उसे सिनेमाई स्वतंत्रता के साथ बनाया गया है। डायरेक्टर आर. बल्कि ने महिलाओं की ‘उन दिनों’ की समस्याओं को बखूबी पर्दे पर उतारते हुए समाजिक ताने-बाने पर जोरदार तमाचा जड़ा है।

अभिनेत्रियों ने भी खुल कर बात की

मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर कहती है कि वे पीरियड शर्म नहीं गर्व की बात है। यह प्राकृतिक है व सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। इसके लिए किसी भी तरह की शर्म महसूस करने की जरूरत नहीं है और न किसी को इसका एहसास हसास कराने की जरूरत है. जरूरी यह है कि हम नियमित इससे जुड़ी स्वच्छता का ध्यान रखें. व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर भी इसके लिए केवल सकारात्मक रुख ही अपनाने की जरूरत है। छात्राओं से सीधे मुखातिब होते हुए छिल्लर ने पैड से जुड़ी बातें साझा की व उनसे भी इस मामले में खुलकर बात रखने की अपील की। मिस वर्ल्ड बनी मानुषी छिल्लर ने कहा कि सेनेटरी पैड को लेकर युवतियां व महिलाएं जितना खुलकर बात करेंगी, उतना ही इस जानकारी का प्रसार होगा।


ट्विंकल खन्ना जो ‘पैडमैन’ की निर्माता कहती हैं और जिन्होंने अपनी किताब में भी अरूणाचलम के कारनामे का ज़िक्र किया था, वो पीरियड को लेकर कहती हैं कि ये एक नेचुरल प्रक्रिया है और इसमें छिपाने जैसा कुछ भी नहीं है। ट्विंकल के मुताबिक वह अपने बेटे तक से पीरियड को लेकर चर्चा कर लेती हैं। ट्विंकल कहती हैं कि युवकों को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए ताकि वो युवतियों के दर्द से परिचित रहें और उनके प्रति सम्मान का भाव रखें और इस बात का मर्म समझें!

करीना कपूर ख़ान ने बहुत पहले ही इस विषय पर कहा था कि- ”पीरियड बंद दरवाजों के पीछे बात करने का सब्जेक्ट नहीं है। मीडिया इस पर खुल कर बात करे. सभी मर्दों को भी इसकी जानकारी जरूर होनी चाहिए। यह एक बहुत सामान्य बात है और लड़कियों को इस दौरान हाइजिन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबको महीने में 30 दिन मिलते हैं काम करने के लिए, पीरियड की वजह से हम महिलाओं को कम दिन क्यों मिले?”

अभिनेत्री ज़रीन ख़ान कहती हैं कि उन्होंने पीरियड की वजह से कभी कोई शूटिंग कैंसिल नहीं की है क्योंकि उनके मुताबिक यह तो हर महीने का पंगा है। ज़रीन कहती हैं कि पीरियड को पता नहीं लोग इतना गंभीर क्यों बना देते हैं, यह तो एक सहज और सामान्य नेचुरल प्रक्रिया है।

‘पिंक’ फेम तापसी पन्नू ने कहा कि लड़कियां लड़कों के मुकाबले इसलिए भी मजबूत होती हैं क्योंकि दर्द सहने की उनकी ट्रेनिंग पीरियड के दौरान हो जाती है। तापसी ने यह भी कहा कि शूटिंग के दौरान वो पीरियड टालने के लिए कई बार दवा ले लेती हैं। तापसी यह कहना भी नहीं भूलतीं कि पीरियड में हर्ट अटैक के बराबर दर्द होता है।

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