सियासत: परिवार से एक को ही कांग्रेस का टिकट

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देहरादून: कांग्रेस नेतृत्व के रुख को भांपा जाए तो उत्तराखंड में पार्टी के कई दिग्गज नेताओं को सांप सूंघ सकता है। पार्टी ने राज्य में एक परिवार से एक को टिकट दिए जाने के संकेत दिए हैं। पंजाब की तर्ज पर उत्तराखंड में भी केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी भी हाईकमान की इस मंशा को ध्यान में रखकर टिकट सूची फाइनल करने में जुटी है। उधर, पार्टी के इस रुख से प्रदेश में कांग्रेस के भीतर बेचैनी बढ़ गई है। गुरुवार को दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री हरीश रावत पार्टी स्टैंड से हटते हुए जीतने की क्षमता रखने वाले मंत्री और बड़े नेताओं के पुत्रों को चुनाव लड़ाने की पैरवी में उतर गए। पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक परिवार से एक को ही टिकट का फार्मूला लागू किया है। इसे अब उत्तराखंड पर भी लागू किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाईकमान की ओर से इस संबंध में रुख स्पष्ट किए जाने के बाद स्क्रीनिंग कमेटी नए सिरे से प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुट गई है।
गौरतलब है कि बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी एक परिवार से एक को टिकट दिए जाने पर जोर देते हुए अपना सुझाव हाईकमान के सामने रखने की बात कही थी। किशोर के इस स्टैंड को अब पार्टी नेतृत्व के स्टैंड से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के इस स्टैंड से प्रदेश में हलचल बढ़ गई है। मुख्यमंत्री और कई मंत्रियों के पुत्र-पुत्री और परिजनों को टिकट के प्रबल दावेदारों में शुमार किया जा रहा है। दिल्ली से बुधवार देर रात्रि केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में शिरकत करने के बाद गुरुवार को हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंत्रियों और बड़े नेताओं के राजनीति में सक्रिय और मजबूत पैठ रखने वाले पुत्र-पुत्रियों को टिकट देने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के पुत्र यदि योग्य हैं तो उन्हें चुनाव लड़ाया जाएगा।
उधर, दिल्ली में केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी की अगली बैठक में अब 15 जनवरी को संभावित है। स्क्रीनिंग कमेटी की ओर से फाइनल की जा रही सूची को 18 जनवरी को प्रस्तावित केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में रखा जा सकता है। उत्तरप्रदेश के चुनाव को देखते हुए केंद्रीय चुनाव समिति और पार्टी नेतृत्व की व्यस्तता के चलते उत्तराखंड के लिए पार्टी प्रत्याशियों की सूची घोषित करने में अब देरी का अंदेशा जताया जा रहा है।
प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट के मंत्रियों मंत्री प्रसाद नैथानी और हरीशचंद्र दुर्गापाल को कांग्रेस का टिकट देना तकरीबन तय माना जा रहा है। पीडीएफ के मंत्री अगर सीट बदलते हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं तो कांग्रेस का समर्थन मिलने के मुद्दे पर गतिरोध अभी टूटा नहीं है। सूत्रों की मानें तो पार्टी 18 जनवरी के बाद ही प्रत्याशियों की सूची जारी करेगी।

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