संत रामपाल को सतलोक आश्रम हत्या मामले में 15 दोषियों सहित उम्रकैद की सजा

Sentenced to life imprisonment including 15 convicts in Satlok Ashram murder case of Sant Rampal

हरियाणा के एक और बाबा को सजा सुनाई गई है। डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के बाद अब बरवाला के सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। सतलोक आश्रम हत्या मामले में संत रामपाल पर सजा का ऐलान हो गया है। उन्हें दो मर्डर केसों में आजीवन कारावास की सजा मिली है। रामपाल के साथ उसके 26 अनुयायियों को भी गुरुवार को दोषी करार दिया गया था। हिसार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी.आर.चालिया ने हत्या के दोनों मामलों और अन्य अपराधों में रामपाल और उसके अनुयायियों को दोषी ठहराया था।

बता दे की हिसार की विशेष अदालत ने हत्‍या के मामले में दोषी करार रामपाल सहित 15 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हरेक पर अलग-अगल दो लाख और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। रामपाल सहित 14 दोषियों को हत्‍या के एक अन्‍य मामले में 17 अक्‍टूबर को भी सजा सुनाई जाएगी।बता दें कि नवंबर 2014 में सतलोक आश्रम में पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान 5 महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद आश्रम संचालक रामपाल पर हत्या के दो मामले दर्ज किए गए थे। केस नंबर-429 (4 महिलाओं व एक बच्चे की मौत) में रामपाल सहित कुल 15 आरोपी थे। हत्या के दूसरे मामले यानी केस नंबर-430 (एक महिला की मौत) में भी रामपाल को दोषी पाया गया है। इस मामले में रामपाल समेत 13 आरोपी थे। इस मामले में सजा का ऐलान बुधवार को होगा। यह है आरोपी
रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, भांजा जोगेंद्र, बहन पूनम और मौसी सावित्री के अलावा बबीता, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, सतबीर सिंह, सोनू दास, देवेंद्र, जगदीश, सुखवीर सिंह, खुशहाल सिंह, अनिल कुमार को कोर्ट ने दोषी ठहराया था। गौरतलब है कि एक अन्य महिला की हत्या के केस में रामपाल समेत 14 दोषियों को 17 अक्टूबर को सजा सुनाई जा सकती है। रामपाल, उसका बेटा वीरेंद्र, राजकपूर उर्फ प्रीतम, राजेंद्र, जोगेंद्र और बबीता दोनों मामलों में दोषी हैं। रामपाल, वीरेंद्र, जोगेंद्र, राजेंद्र और राजकपूर उर्फ प्रीतम पहले से जेल में हैं। बबीता जमानत पर थी। अब उसे भी जेल भेज दिया गया है। संजय और राजबाला भी दोनों मामलों में आरोपी हैं, लेकिन फरार हैं। दोनों मामलों में कुल 23 लोग दोषी ठहराए गए हैं।

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यह है पूरा मामला, ऐसे हुई थी हत्या
2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई थी। प्रशासन ने रामपाल और उनके 37 अनुयायियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। इसी मामले में हिसार कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बाबा की पेशी थी, जहां रामपाल समर्थकों ने बवाल किया। इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल और उसके अनुयायियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2014 को डीजीपी और गृह सचिव को आदेश दिया कि 10 नवंबर 2014 को रामपाल को पेश करें। 10 नवंबर को रामपाल ने लोगों को आश्रम में ढाल बनाकर खड़ा कर दिया। कोर्ट के आदेश के बावजूद 10 और 17 नवंबर को रामपाल की पेशी नहीं हो पाई। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस-प्रशासन को फटकार लगाते हुए 21 नवंबर तक रामपाल को पेश करने को कहा। 19 नवंबर 2014 को 60 घंटे तक की घेराबंदी और करीब 56 घंटे की कार्रवाई के बाद रामपाल ने रात में सरेंडर किया। इस पूरी घटना के दौरान 6 लोगों की मौत हो गई।

सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम

सुरक्षा के कड़े इंतजाम हरियाणा के हिसार शहर को किले में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी संभावित बवाल, हिंसा और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। हिसार जिले में धारा-144 लागू कर दी गई थी। फैसले से पहले ही अदालत के चारों ओर तीन किलोमीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया था। इस सुरक्षा घेरे को भेदकर कोई भी बाहरी व्यक्ति अंदर प्रवेश नहीं कर सकेगा। सुरक्षा इंतजाम के लिए हिसार के 1300 पुलिसकर्मी, बाहरी जिलों से 700 जवान, RAF की 5 कंपनियां और हरियाणा पुलिस के 12 SP की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा दूसरे जिलों के डीएसपी की ड्यूटी हिसार में लगाई है। इस बीच पुलिस ने जिले में फ्लैग मार्च किया है।

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