शहीद मेजर विभूति की लव स्टोरी ने दुनिया को किया भावुक,पत्नी बोलीं, नहीं चाहिए किसी की सहानुभूति

पुलवामा में आतंकी मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए मेजर विभूति ढौंडियाल की पत्नी शहीद पति को देख गर्व से भर गईं। 18 अप्रैल 2018 को ही मेजर विभूति का विवाह निकिता से हो गया। विभू,19 अप्रैल को पहली बार निकिता को लेकर डंगवाल मार्ग वाले घर पहुंचे थे। दोनों की इस छोटी लव स्टोरी से देश ही नहीं पूरी दुनिया भावुक हो गई है।

इनकी लव स्टोरी 19 अप्रैल 2018 से 19 फरवरी 2019 बस दस महीने तक की रही लेकिन इस छोटी सी कहानी ने दुनिया को भावुक कर दिया। निकिता की वीरान आंखें फूलों से सजी मेजर की तस्वीर पर अटक गई। वक्त की मार से बेजार उसके चेहरे पर न जाने कितने रंग आ-जा रहे थे। वह गुलाबी-सा रंग था, शायद वह उस दिन के पायदान पर खड़ी थी, जब मेजर उसे ब्याह कर इस दहलीज पर लाए थे।वह खुशियों के सातवें आसमान पर थी। बस दस महीने में सब कुछ बदल गया। आज जमाना उसके साथ था, मगर हाथों में मेजर का हाथ नहीं था। पत्नी शहीद पति को देख गर्व से भर गईं।

अंतिम संस्कार के दौरान पहले उन्होंने अपने शहीद पति का माथा चूमा, बोला आई लव यू…जय हिंद मेरे हीरो। उन्होंने आगे कहा कि सबको पता है कि मैं आपको बहुत प्यार करती हूं। हमेशा आपकी फिक्र रहती थी। आप मुझे मेरी जान से भी प्यारे हो। आप मुझे ही नहीं बल्कि पूरे देश से प्यार करते थे। सबसे प्यार करते थे। आपने देश के लिए अपनी जिंदगी दे दी। उन्होंने कहा कि मैं सभी से निवेदन करती हूं कि वे सहानुभूति न रखें, बल्कि बहुत मजबूत बनें, क्योंकि यह वीर हमारे यहां खड़े किसी भी व्यक्ति की तुलना में बहुत बड़ा है। उसके बाद घर में रो रहे रिश्तेदारों को निकिता की दो अंगुलियां मेजर की तस्वीर की ओर थी। होठ, थरथरा रहे थे, शब्द बमुश्किल हलक से निकल रहे थे, वह कहे जा रही थी, उसके लिए मत रोना, मेरा मेजर हीरो है…मेरा मेजर हीरो है…।

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सास ने बयां किया कश्मीर से पलायन का दर्द

आतंकवाद के चलते कश्मीरी पंडित करीब तीन दशक से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। 90 के दशक में यह लोग अपना घर-बार छोड़कर चले आए और उस वक्त नरसंहार में सैकड़ों पंडितों का कत्लेआम हुआ। शहीद विभूति शंकर ढौंडियाल की मौसेरी सास गिरीजा वारिको भी इस दर्द से अछूती नहीं हैं। उन्हें आज भी याद है कि उनके परिवार को किन परिस्थितियों में कश्मीर से पलायन करना पड़ा। अब उसी कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते उनका दामाद शहीद हो गया। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि इस ओर निर्णायक कदम उठाए जाएं। यह जान लीजिए कि कश्मीरी ही उग्रवादियों को पनाह दे रहे हैं। ऐसे में न केवल आतंकी बल्कि उनके मददगारों का भी चुन चुनकर सफाया करना होगा। हमारे नेता कहते हैं कि बदला लिया जाए, पर सवाल ये कि यह होगा कब।

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