सुप्रीम कोर्ट : निर्भया गैंगरेप केस के सभी दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, पिता बोले- फांसी में न हो देरी

Supreme Court: Nirbhaya gangrape case awarded death sentence for all convicts

राजधानी दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट आज तीन दोषियों के मौत की सजा संबंधी दायर सपुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। इस तरह से निर्भया के सभी दोषियों को फांसी की सजा होगी।फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा है कि उन्हें न्याय मिला है। वहीं, निर्भया के पिता ने कहा है कि अब दोषियों को फांसी की सजा देने में ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए।

दरअसल निर्भया मामले के चार आरोपियों में से तीन ने अपनी फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पुनर्याचिकापर उस वक्त सुनवाई की जाती है ,जब उसमें कोई ऐसा बिंदु हो जो पहले अदालत में उठाया न गया हो या उसे नजरअंदाज किया गया हो। इस याचिका में ऐसा कुछ नहीं था, इसलिए अदालत इनकी सजा को बरकरार रखते हुए इन्हें फांसी की सजा देती है। आपको बता दे की फैसले से पहले निर्भया का परिवार अपने वकील के साथ कोर्ट में पहुंचा था। निर्भया के माता-पिता ने कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की थी।
निर्भया की मां आशा देवी के अनुसार, ‘हमारा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। इंसाफ मिलने में देरी हो रही है। इससे समाज की अन्य पीड़िताएं प्रभावित होती हैं। दोषियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाना चाहिए, ताकि निर्भया को न्याय मिल सके। ‘फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका से न्याय मिला है। निर्भया के पिता ने कहा कि अब दोषियों को फांसी की सजा मिलने में देर नहीं होनी चाहिए।
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गौरतलब है की निर्भया के साथ दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था और गंभीर चोट पहुंचाने के बाद सड़क पर फेंक दिया था। सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में 29 दिसंबर 2012 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल था, उसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया और तीन साल के लिए सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया था। बता दें कि निर्भया कांड के चार दोषियों में शामिल अक्षय कुमार सिंह (31) ने सुप्रीम कोर्ट के पांच मई 2017 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी।

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