उत्तराखंड में पहली बार सामने आया ऐसा नशा , पढ़े पूरी खबर। ..

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ऋषिकेश पुलिस ने एलएसडी ड्रग्स के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार किया। उत्तराखंड में इस तरह के ड्रग्स की बरामदगी का यह पहला मामला है। इसकी कीमत करीब चार लाख बताई जा रही है।
टिकटनुमा करीब 100 पत्ते बरामद ड्रग्स की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत चार लाख रुपये आंकी गई है।

कोतवाली पुलिस ने दावा किया कि उत्तराखंड में इस तरह के ड्रग्स की यह पहली बरामदगी है। एसएसडी (लिसर्जिक एसिड डायथिलेमाइड) एक तरह का ड्रग होता है। इसे नशे के आदी लोग ब्लॉटर पेपर के रूप में चाटते हैं। इसके लक्षणों को पहचानना आसान नहीं होता है। सेवन करने के बाद लोगों को सब कुछ अच्छा लगने लगता है।

एलएसडी को एसिड, ब्लॉटर या डॉट्स भी कहा जाता है। यह स्वाद मे कड़वी, गंधरहित और रंगहीन दवा होती है। बाजार में रंगीन टेबलेट, पारदर्शी तरल, जिलेटिन के पतले-पतले वर्ग के रूप में या सोख्ता कागज (ब्लॉटर पेपर) के रुप में मिलती है। आमतौर पर इसे नशे के आदी लोग ब्लॉटर पेपर के रूप में चाटते हैं। या टेबलेट के रूप में लेते हैं, जबकि जिलेटिन और तरल के रूप में इसे आँखों में रखा जा सकता है।

एलएसडी सेवन के लक्षण

इसका सेवन करने वालों की आंखों की पुतलियां तन जाती है। जैसे पुतलियां खींच कर लंबी कर दी गयी हों। बहुत ज्यादा पसीना आना, व्यक्ति में असहजता और घबराहट की स्थिति इसके लक्षण हैं।
कैसे करते है इसकी पहचान

एलएसडी के सेवन करने वाले को पहचान पाना भी आसान नहीं होता है। इसका असर सामान्य स्थिति में 24 घंटे में खत्म हो जाता है और किसी प्रकार की दवाई या जांच (टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट्स) की जरूरत नहीं होती। साथ ही यह सामान्य जांचों के द्वारा सामने भी नहीं आता। इसके लिए विशेष प्रकार की रक्त जांच का प्रयोग किया जाता है।

कैसे होते है दुष्प्रभाव
इसका प्रयोग करने वालों को कभी-कभी एलएसडी फ्लैश बैक हो जाता है।
एलएसडी का सेवन करने से गंभीर मनोरोग होने की संभावना होती है।इस स्थिति में व्यक्ति को बिना ये ड्रग्स लिए ही उसके प्रभाव का अनुभव होने लगतें हैं। यह स्थिति ड्रग्स बंद करने के कुछ दिनों से लेकर साल भर से भी ज्यादा समय बाद कभी भी हो सकती है। यह स्थिति सालों तक रह सकती है।

 

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