उत्तराखंड के मदरसों में एकता की मिसाल ,मदरसों में पढ़ाई जायगी गीता

Unity in the madarsas of Uttarakhand,

उत्तराखंड में मदरसों में एकता की मिसाल पेश की है अब प्रदेश के मदरसों में क़ुरान के साथ गीता का भी पाठ पढ़ाया जाएगा। जिससे यह प्रदर्शित होता है की भारत की संस्कृति यहां की एकता हर जगह फैली हुई है।उत्तराखंड शिक्षा मदरसा बोर्ड ने मदरसों के पाठ्यक्रम में संस्कृत विषय को भी शामिल कर लिया है। इतना ही नहीं,मदरसों में अब हिंदू धर्म के वेदों की आयुष पद्धति की कक्षाएं भी चलेंगी।

पुराने समय से चली आ रही मदरसों की शिक्षा पद्धति में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की पाठ्यक्रम एवं पाठ्यचर्चा समिति की बैठक में बदलाव पर विचार हुआ। बैठक में बोर्ड सदस्यों ने कहा कि मदरसों में दी जा रही शिक्षा बच्चों में संस्कार बोने का काम करती है। और वर्तमान स्तिथि में हिंदू-मुस्लिम भाइयों में परस्पर पेम और एकता की भावना की जरूरत है। इसके अंतर्गत ही कौमी एकता की नई इबारत लिखते हुए मदरसों में सिर्फ कुरान पाक का ज्ञान ही नहीं दिया जाएगा अब वहां छात्रों की हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता का पाठ भी पढ़ाया जाएगा।साथ ही मदरसों में आयुष विद्या की कक्षाओं को भी स्वीकृति दी गई।
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प्रदेश के मदरसे शिक्षा के मंदिर हैं। शिक्षा समेत यहां संस्कार भी सिखाये जाते हैं। आपसी प्रेम, भाईचारे से रहना सिखाया जाता है। मदरसा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अहमद अखलाक अंसारी ने कहा कि इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी में कट्टरता की मानसिकता का त्याग कर राष्ट्र निर्माण में एक सोच के साथ सहयोग करना है। दोनों को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। इसमें मदरसे अहम भूमिका निभा सकते हैं। बैठक में समिति ने मदरसों में अलीम (बारहवीं कक्षा) तक पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एनसीईआरटी) के सिलेबस का संस्कृत विषय का पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया गया। बदलते स्वरूप को देखते हुए गणित, विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान विषय मे भी एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने का फैसला लिया गया है।

 

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