आखिर कब तक होते रहेंगे उत्तराखंड के जवान शहीद

उत्तराखंड के जवान आखिर कब तक सरहद पर शहीद होते रहेंगे। इस बात का पता किसी को नहीं क्योकि पडोसी देश हमला करता रहा है और कर रहा है। इस बीच देश की जनता अपने घरो में सुरक्षित रहे इसके लिए वह हर समय अपनी जान जोखिम में डाले अपने घर परिवार को छोड़ सिर्फ मातृभूमि पर समर्पित होने के लिए दुश्मनो से दो चार होते है। फिर उत्तराखंड का एक और लाल आंतकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया है।

जवान राकेश रतूड़ी मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के पाबौ ब्लॉक की बाली कंडारस्यूं पट्टी स्थित सांकर सैंण गांव के रहने वाले थे। सालभर पहले ही उन्होंने प्रेमनगर के बड़ोवाला में घर बनाया था। वह अपने पीछे पत्नी नंदा देवी और दो बच्चों नितिन और किरण को छोड़ गए हैं। उनका बेटा नितिन (17 वर्ष) एसजीआरआर पटेलनगर में कक्षा ग्यारह का छात्र है। जबकि बेटी किरण(19 वर्ष) पत्राचार से बीए कर रही।
जम्मू कश्मीर में उडी हमले के बाद दूसरा बड़ा आतंकी हमला सुजवां में हुआ जिसमे जवान राकेश रतूड़ी घायल हो गए थे। जिसके बाद उन्होंने मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हमले के बाद पेराकमाण्डो ने मोर्चा संभाला था जो अभी तक चल रहा है। कश्मीर में एनकाउंटर ऑपरेशन जारी है।

आपको बता दे की जम्मू कश्मीर के सुजवां में दो दिन पहले आतंकियों ने हमला किया था। इस दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए हवलदार राकेश रतूड़ी(44 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सेना के अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।


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शहीद के चाचा शेखरानंद रतूड़ी ने बताया कि महार रेजीमेंट में तैनात राकेश साल 1996 में फौज में भर्ती हुए थे। उनकी शिक्षा राइंका सांकर सैंण में हुई। वह तीन जनवरी को छुट्टी पर आए थे और 9 जनवरी को वापस चले गए। पिछले तीन दिन से उनका फोन नहीं उठ रहा था। जिस कारण परिवार चिंतित था। लेकिन कल रात उन्हें राकेश की शहादत की खबर मिली। जिसके बाद से क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों में मातम पसर गया है। जवान के पार्थिव शरीर का सेना के सम्मान के साथ अंतिमसंस्कार किया जाएगा। पर सवाल यही उठता हिअ आखिर कबतक इन जवानो का खून बहता रहेगा। इस और एक कड़कड़ाम कब उठाया जाएगा।

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