भारतीय अपराध कर क्यों भाग जाते हैं ब्रिटेन ,जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

Why do the Indian criminals run away from Britain, know the reason behind this

आपने अक्सर सुना होगा देखा होगा की भारत में बड़े-बड़े अपराध कर भारतीय ब्रिटेन में शरण ले लेते है और वहन आराम से जीवन यापन करते है। हाल ही में देश के सबसे बैंक घोटाले के आरोपी नीरव मोदी और बैंकों के हजारों करोड़ रुपये डकार कर विजय माल्‍या ब्रिटेन भाग गए। क्या आप जानते है इसके पीछे की वह क्या है क्यों आरोपी ब्रिटेन में जाकर शरण लेते है। आइये हम आपको बताते है इसा क्यों करते है।
भारत और ब्रिटेन ने 1993 में प्रत्‍यर्पण संधि है वजह
दरअसल ब्रिटेन भगौड़ों के लिए शानदार शरणस्‍थली है। उसने मानवाधिकारों पर यूरोपियन संधिपत्र पर दस्‍तखत कर रखे हैं। अगर ब्रिटिश कोर्ट को लगता है कि किसी व्‍यक्ति को उसके देश वापस भेजने पर उसे प्रताडि़त या मौत की सजा दी जा सकती है या राजनीतिक कारणों से उसका प्रत्‍यर्पण मांगा जा रहा है तो वह उसे वापस भेजने से इनकार कर सकता है।भारत और ब्रिटेन ने 1993 में प्रत्‍यर्पण संधि पर दस्‍तखत किए थे. लेकिन इस पर पूरी तरह से अमल नहीं हो पाया। भारत ने 2008 के हान्‍ना फॉस्‍टर हत्‍या मामले में ब्रिटिश नागरिक मनिंदरपाल सिंह कोहली को प्रत्‍यर्पित किया था लेकिन ब्रिटेन ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया। ब्रिटेन ने भारत की कई प्रत्‍यर्पण अर्जियों को रोक रखा है। अब नीरव मोदी ने भी ब्रिटेन में शरण की अर्जी दे रखी है और अगर उसे मान लिया जाता है तो वह कम से कम पांच साल के लिए बेफिक्र घूम सकते हैं। शरण देने की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। बता दे की ब्रिटेन के शरण देने के नियमों ने भी कई अपराधियों को बचा रखा है।
5500 भारतीयों ने ब्रिटेन में मांगी शरण
आपको जानकर हैरानी होगी की साल 2013 के बाद से करीब 5500 भारतीयों ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मांगी है। इनमें से अनेकों के खिलाफ आपराधिक मामले भी नहीं है। बता दे की ब्रिटेन भागने वाले भारतीयों में कई बड़े नाम शामिल हैं जैसे म्‍यूजिक डायरेक्‍टर नदीम सैफी, पूर्व आईपीएल प्रशासक ललित मोदी, किंगफिशर एयरलाइंस के विजय माल्‍या और नीरव मोदी। इन लोगों के पास पैसों की भी कमी नहीं है और ये लंबे केस लड़ने में सक्षम हैं। इस वजह से भी कई बार प्रत्‍यर्पण नहीं होता है।
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यह है प्रमुख कारण
ब्रिटिश मानवाधिकार आयोग दुनिया के और देशों के मानवाधिकार आयोग से ज्यादा सख्त और मानवीय पहलू को समझने वाला माना जाता है। पूर्व के कई मामले ऐसे थे जिनमें उस समय की राजनीतिक परिस्थितियां इजाजत नहीं दे रही थी। दूसरे दलों की सरकार सत्ता में आती है तब तक काफी देर हो जाती है। फिर कानूनी पेंच में प्रत्यर्पण नहीं हो पाता। कई ऐसे केस हैं आरोपी की उम्र ज्यादा होने का बहाना बनाया जाता है। आरोपी का खराब मेडिकल बैकग्राउंड होना भी जिम्मेदार होता है। भारतीय जेलों में की दशा का हवाला देकर भी आरोपी बच निकलते हैं।

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