जानिए किस तरह करे शुक्रवार को माँ दुर्गा की पूजा ,जिससे पूरी होगी मनोकामनाए

Worship on Maa Durga should be done this Friday, will be pleased

शुक्रवार को सबसे पहले माँ दुर्गा जी की पूजा करनी चाहिए। इससे माता प्रसन्न हो जाएगी। जिससे आपकी साडी मनोकामनाए पूर्ण होगी। क्योकि भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है। शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है। वेदों में भी दुर्गा का व्यापक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी का उमा हैमवती अर्थात हिमालय की पुत्री, उमा के रूप में उनका वर्णन किया गया है। पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है, क्‍योंकि उन्‍हें शिव की पत्नी कहा गया है जो आदिशक्ति का एक रूप हैं। शिव की उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है।
माता की मूर्ति में उनके रूप का आवाहन करें, फिर मूर्ति को आसन प्रदान करें। अब उसको स्नान कराएं, इसके लिए पहले जल फिर पंचामृत और पुन: जल से स्नान कराएं। इसके पश्‍चात देवी को वस्त्र अर्पित करें और आभूषण व पुष्पमाला पहनाएं। अब इत्र अर्पित करके कुमकुम और अष्टगंध से तिलक करें।

इतना करने के बाद माता की आरती की तैयार करें। उससे पहले उन्‍हें धूप व दीप अर्पित करें। दुर्गा जी की पूजा में दूर्वा का प्रयोग निषिद्ध है। माता को लाल गुड़हल के फूल बहुत पसंद हैं, इसलिए संभव हो तो अवश्‍य चढ़ायें और 11 या 21 चावल चढ़ायें। अब श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक तैयार करके माता की आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें, फिर माता को भोग लगायें और इसमें नारियल अवश्‍य शामिल करें। दुर्गा जी की आराधना के समय ‘‘ऊँ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप करें। चढ़ाने के कुछ समय बाद नारियल फोड़ कर प्रसाद के रूप में वितरित करें।
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माता दुर्गा आद्य शक्‍ति के एक रूप में पूजित होती हैं। एक प्रमुख संप्रदाय के अनुसार वही सर्वोच्‍च देवता हैं।देवी दुर्गा का निरूपण सिंह पर सवार एक निर्भय स्त्री के रूप में किया जाता है। वे आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है। उन्होने महिषासुर नामक असुर का वध किया। हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी दुर्गा के रूप में वर्णित हैं।

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